स्टीविया की खेती: 'मीठी तुलसी' से 1 एकड़ में 3 लाख की कमाई | Stevia Farming Guide 2026

स्टीविया की खेती: 'मीठी तुलसी' से 1 एकड़ में 3 लाख की कमाई | Stevia Farming Guide 2026

Stevia Farming Guide

स्टीविया की खेती: 'मीठी तुलसी' से करोड़ों की कमाई (Stevia Farming Mega Guide 2026)

आजकल की बदलती जीवनशैली में डायबिटीज (मधुमेह) और मोटापा एक महामारी का रूप ले चुका है। दुनिया भर के लोग चीनी (Sugar) का विकल्प ढूंढ रहे हैं। ऐसे में एक पौधा जो चीनी से 300 गुना ज्यादा मीठा है लेकिन इसमें कैलोरी शून्य है, वह किसानों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है। हम बात कर रहे हैं स्टीविया (Stevia) की, जिसे भारत में 'मीठी तुलसी' के नाम से भी जाना जाता है।

स्टीविया की खेती (Stevia Farming) अब भारत में एक बड़े व्यवसाय का रूप ले चुकी है। इसकी सूखी पत्तियों की मांग फार्मा कंपनियों, बेवरेज इंडस्ट्री और हेल्थ फूड निर्माताओं के बीच बहुत तेजी से बढ़ रही है। अगर आप पारंपरिक खेती से हटकर कुछ ऐसा करना चाहते हैं जिसमें एक बार बुवाई करके 5 साल तक कमाई हो, तो स्टीविया सबसे बेहतरीन विकल्प है।

🌟 गन्ने से स्टीविया तक: किसान गुरप्रीत की कहानी

पंजाब के जालंधर जिले के किसान श्री गुरप्रीत सिंह बरसों से गन्ने और गेहूं की खेती कर रहे थे। लागत बढ़ने और भुगतान में देरी के कारण वे परेशान थे। उन्होंने इंटरनेट पर स्टीविया के बारे में पढ़ा और हिमाचल प्रदेश के पालमपुर स्थित CSIR संस्थान से ट्रेनिंग ली।

शुरुआत में उन्होंने 1 एकड़ में टिश्यू कल्चर वाले स्टीविया के पौधे लगाए। उन्होंने ड्रिप इरिगेशन का इस्तेमाल किया और कोई रासायनिक कीटनाशक नहीं डाला।

परिणाम: पहले साल में ही उन्होंने 3 कटिंग लीं। उनकी सूखी पत्तियां 120 रुपये किलो के भाव से बिकीं। सारा खर्चा काटकर उन्हें 1 एकड़ से 2.5 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ। आज वे 10 एकड़ में स्टीविया उगा रहे हैं और कई कंपनियों के साथ उनका कॉन्ट्रैक्ट है।

1. स्टीविया क्या है और इसकी मांग क्यों है?

स्टीविया (Stevia rebaudiana) सूरजमुखी कुल का एक पौधा है। इसकी पत्तियों में 'स्टीवियोसाइड' नामक तत्व होता है, जो चीनी से कई गुना मीठा होता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह रक्त शर्करा (Blood Sugar) को नहीं बढ़ाता।

  • स्वास्थ्य लाभ: यह जीरो कैलोरी, जीरो फैट और जीरो कार्बोहाइड्रेट वाला स्वीटनर है।
  • बाजार मांग: कोका-कोला, पेप्सी और बड़ी दवा कंपनियां अब अपने उत्पादों में चीनी की जगह स्टीविया का उपयोग कर रही हैं।
  • लंबी अवधि की फसल: एक बार लगाने पर इसकी जड़ें 5 साल तक जीवित रहती हैं और हर साल 3-4 बार पत्तियां देती हैं।

2. उपयुक्त जलवायु और मिट्टी (Climate & Soil)

स्टीविया एक अर्द्ध-आर्द्र (Semi-humid) और सबट्रॉपिकल पौधा है। भारत की जलवायु इसके लिए बहुत उपयुक्त है।

(A) जलवायु

इसके लिए 10°C से 40°C तक का तापमान सहन करने की क्षमता होती है।

  • सबसे अच्छा तापमान: 15°C से 30°C।
  • यह पाले (Frost) को सहन नहीं कर सकता। ज्यादा ठंड में पौधे की ग्रोथ रुक जाती है।
  • इसे साल भर धूप की जरूरत होती है। दिन की लंबाई जितनी ज्यादा होगी, पत्तियों में मिठास उतनी ही बढ़ेगी।

(B) मिट्टी

  • रेतीली दोमट (Sandy Loam): यह सबसे अच्छी मिट्टी है।
  • pH मान: 6.0 से 7.5 के बीच। लवणीय (Saline) मिट्टी में यह नहीं उगता।
  • जल निकासी: खेत में पानी रुकना नहीं चाहिए। अगर 24 घंटे पानी खड़ा रह जाए, तो स्टीविया के पौधे मर जाते हैं। इसलिए 'ऊठी हुई क्यारियों' (Raised Beds) पर खेती करना सबसे अच्छा है।

3. खेत की तैयारी और रोपाई (Planting Method)

स्टीविया की खेती बीजों से करना थोड़ा मुश्किल होता है क्योंकि बीजों का अंकुरण प्रतिशत कम होता है। इसलिए टिश्यू कल्चर (Tissue Culture) या कलम (Cutting) से तैयार पौधों का उपयोग करना सबसे अच्छा है।

खेत की तैयारी:

  1. खेत की 2-3 गहरी जुताई करें और मिट्टी को भुरभुरा बना लें।
  2. अंतिम जुताई के समय 10-15 टन सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट मिलाएं।
  3. बेड बनाना: जमीन से 15-20 सेमी ऊंची और 2 फीट चौड़ी बेड (Raised Bed) बनाएं। बेड से बेड की दूरी 1.5 फीट रखें।

रोपाई का समय:

  • फरवरी से मार्च (वसंत ऋतु)
  • सितंबर से अक्टूबर (मानसून के बाद)

पौधों की संख्या (Spacing):

  • पौधे से पौधे की दूरी: 30 सेमी (1 फीट)
  • कतार से कतार की दूरी: 45 सेमी (1.5 फीट)
  • एक एकड़ में लगभग 30,000 से 40,000 पौधे लगते हैं।

4. खाद और सिंचाई प्रबंधन

स्टीविया एक औषधीय पौधा है, इसलिए इसमें रसायनिक खादों का प्रयोग कम से कम करना चाहिए। यूरिया या डीएपी ज्यादा डालने से पत्तियों की मिठास कम हो सकती है।

  • खाद: नीम की खली, बोन मील और जैविक खाद का प्रयोग करें। सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micronutrients) का स्प्रे हर 2 महीने में करें।
  • सिंचाई: स्टीविया को नमी पसंद है लेकिन जमा हुआ पानी नहीं। गर्मियों में हर 3-4 दिन में और सर्दियों में 10 दिन में सिंचाई करें। ड्रिप इरिगेशन (Drip Irrigation) और मल्चिंग का उपयोग सबसे फायदेमंद है।

5. निराई-गुड़ाई और पिंचिंग (Weeding & Pinching)

खरपतवार स्टीविया के सबसे बड़े दुश्मन हैं क्योंकि पौधे की ऊंचाई कम होती है। हाथ से निराई करना सबसे अच्छा है।
पिंचिंग (Pinching): रोपाई के 1 महीने बाद पौधे के ऊपरी हिस्से (Top) को थोड़ा काट दें। इससे पौधा झाड़ीनुमा बनेगा और ज्यादा शाखाएं निकलेंगी, जिसका मतलब है ज्यादा पत्तियां और ज्यादा मुनाफा।

6. कटाई और सुखाने की विधि (Harvesting & Drying)

स्टीविया की पहली कटाई रोपाई के 3-4 महीने बाद शुरू हो जाती है। इसके बाद हर 3 महीने में कटाई की जा सकती है।
कब काटें: जब पौधों में फूल आने शुरू हों (Budding stage), तब पत्तियों में स्टीवियोसाइड की मात्रा सबसे अधिक होती है। जमीन से 5-10 सेमी ऊपर से पौधे की कटाई करें।

सुखाना (Drying): कटाई के बाद पत्तियों को टहनियों से अलग करें और उन्हें छांव में सुखाएं। सीधी धूप में सुखाने से पत्तियों का हरा रंग उड़ जाता है और क्वालिटी खराब हो जाती है। ड्रायर (Solar Dryer) का उपयोग करना सबसे अच्छा है। सूखने के बाद पत्तियों में नमी 8-10% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

7. लागत और मुनाफे का गणित (Cost & Profit Analysis)

स्टीविया की खेती में सबसे बड़ा खर्चा पौधों का होता है, लेकिन यह वन-टाइम इन्वेस्टमेंट है।

विवरण (प्रति एकड़) अनुमानित लागत
पौधे (30,000 @ ₹3-₹4) ₹1,00,000 - ₹1,20,000
खेत तैयारी और बेड बनाना ₹15,000
खाद और ड्रिप (सब्सिडी के बाद) ₹30,000
निराई और कटाई (लेबर) ₹35,000
कुल लागत (पहले साल) ₹1,80,000 - ₹2,00,000

कमाई (Income):

  • सूखी पत्तियों का उत्पादन: 2500 से 3000 किलो (सालाना)।
  • बाजार भाव: ₹100 से ₹150 प्रति किलो।
  • कुल आय: 2500 x ₹120 = ₹3,00,000 सालाना
  • शुद्ध मुनाफा (पहले साल): ₹1 लाख।
  • दूसरे साल से मुनाफा: चूंकि पौधे का खर्चा नहीं होगा, मुनाफा बढ़कर ₹2.5 लाख तक हो जाएगा।

निष्कर्ष (Conclusion)

स्टीविया की खेती (Stevia Farming) भविष्य की खेती है। जैसे-जैसे लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो रहे हैं, चीनी की जगह स्टीविया की मांग बढ़ रही है। लेकिन ध्यान रहे, इसकी खेती शुरू करने से पहले बेचने की व्यवस्था (Marketing) सुनिश्चित कर लें। कई कंपनियां 'कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग' (Contract Farming) की सुविधा देती हैं, जो सबसे सुरक्षित रास्ता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ - Stevia Farming)

Q1. स्टीविया की पत्तियां कहां बेचें?

उत्तर: आप इसे सीधे हर्बल कंपनियों, आयुर्वेदिक दवा निर्माताओं, या कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग कराने वाली एजेंसियों को बेच सकते हैं। इसके अलावा आप खुद इसका पाउडर बनाकर ऑनलाइन (Amazon, Flipkart) भी बेच सकते हैं।

Q2. क्या स्टीविया को गमले में उगा सकते हैं?

उत्तर: जी हाँ, स्टीविया को घर पर 12-14 इंच के गमले में आसानी से उगाया जा सकता है। इसे 'किचन गार्डन' में लगाकर आप घर की चीनी की जरूरत पूरी कर सकते हैं।

Q3. स्टीविया के पौधे कहां से मिलेंगे?

उत्तर: इसके पौधे पालमपुर (HP) स्थित CSIR संस्थान, कृषि विश्वविद्यालयों या प्रमाणित प्राइवेट नर्सरी से प्राप्त किए जा सकते हैं।

Q4. क्या स्टीविया की खेती में सब्सिडी मिलती है?

उत्तर: हाँ, राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) स्टीविया की खेती पर 30% तक सब्सिडी प्रदान करता है। अधिक जानकारी के लिए अपने जिले के उद्यान विभाग से संपर्क करें।

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