Polyhouse Subsidy 2026: आवेदन कैसे करें? पॉलीहाउस खेती से लाखों की कमाई

Polyhouse Subsidy 2026: आवेदन कैसे करें? पॉलीहाउस खेती से लाखों की कमाई

पॉलीहाउस सब्सिडी 2026: आवेदन कैसे करें, लाभ और संपूर्ण प्रक्रिया | Polyhouse Farming Subsidy in Hindi

पॉलीहाउस सब्सिडी 2026: छोटे किसान कैसे करें लाखों की कमाई?

Polyhouse Farming Introduction

भारत में खेती अब केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि एक 'बिजनेस' बन चुकी है। पारंपरिक खेती में मौसम की मार और आवारा पशुओं के नुकसान के कारण किसानों का मुनाफा घट रहा है। ऐसे में पॉलीहाउस (Polyhouse) तकनीक किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

लेकिन, पॉलीहाउस लगाने में शुरुआती लागत (Initial Cost) काफी ज्यादा आती है, जिससे छोटे किसान इसे अपनाने से हिचकिचाते हैं। इसी समस्या को दूर करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें भारी सब्सिडी (Subsidy) प्रदान करती हैं।

इस विस्तृत लेख में हम जानेंगे कि पॉलीहाउस क्या है? इसके फायदे क्या हैं? और सबसे महत्वपूर्ण—सरकार से 50% से 85% तक सब्सिडी कैसे प्राप्त करें?

पॉलीहाउस क्या है? (What is Polyhouse Farming)

पॉलीहाउस लोहे के ढांचे पर पॉलीथीन की चादर चढ़ाकर बनाया गया एक घर जैसा ढांचा होता है। इसके अंदर का वातावरण (तापमान, नमी और रोशनी) पूरी तरह से नियंत्रित रहता है। इसे संरक्षित खेती (Protected Cultivation) भी कहा जाता है।

Polyhouse Structure Details

साधारण शब्दों में कहें तो, यह पौधों को बेमौसम बारिश, कड़कती धूप, पाला और कीटों से बचाने का एक "कवच" है। इसमें आप उन फसलों को भी उगा सकते हैं जो उस मौसम की नहीं हैं, जैसे गर्मियों में शिमला मिर्च या बेमौसम टमाटर।

पॉलीहाउस खेती के जबरदस्त फायदे

सरकार इस पर इतना जोर क्यों दे रही है? इसके पीछे कई बड़े कारण हैं:

  1. 5 से 10 गुना ज्यादा पैदावार: खुले खेत के मुकाबले पॉलीहाउस में प्रति एकड़ उत्पादन बहुत अधिक होता है। पौधे ऊपर की ओर बढ़ते हैं (Vertical Farming), जिससे जगह का सही उपयोग होता है।
  2. बेमौसम खेती और ज्यादा भाव: जब बाजार में कोई सब्जी उपलब्ध नहीं होती, तब पॉलीहाउस का किसान उसे बेचकर 3 गुना तक ज्यादा दाम कमाता है। उदाहरण के लिए, ऑफ-सीजन में करेले या खीरे के दाम आसमान छूते हैं।
  3. कीट और रोगों से मुक्ति: चूंकि यह चारों तरफ से बंद होता है, इसलिए बाहर के कीट-पतंगे अंदर नहीं आ पाते। इससे कीटनाशकों का खर्च 80% तक कम हो जाता है।
  4. पानी की भारी बचत: पॉलीहाउस में अनिवार्य रूप से 'ड्रिप इरिगेशन' (टपक सिंचाई) का उपयोग होता है। इससे पानी सीधे जड़ों में जाता है और वाष्पीकरण कम होता है।
प्रो टिप: पॉलीहाउस में सबसे ज्यादा मुनाफा देने वाली फसलों में रंगीन शिमला मिर्च (लाल-पीली), खीरा, चेरी टमाटर और जरबेरा (फूल) शामिल हैं। शुरुआत करने से पहले इन फसलों की बाजार मांग जरूर चेक करें।

पॉलीहाउस पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी (Subsidy Details 2026)

भारत सरकार के राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) और एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के तहत पॉलीहाउस लगाने के लिए सब्सिडी दी जाती है। यह सब्सिडी अलग-अलग राज्यों और किसान की श्रेणी के अनुसार बदलती रहती है।

विवरण सब्सिडी प्रतिशत
सामान्य श्रेणी के किसान 50% तक
पहाड़ी राज्य / पूर्वोत्तर भारत 85% तक
लघु और सीमांत किसान कुछ राज्यों में 70% तक
Polyhouse Crops and Subsidy

आमतौर पर, एक हाई-टेक पॉलीहाउस बनाने की लागत (बिना सब्सिडी के) लगभग ₹800 से ₹1000 प्रति वर्ग मीटर आती है। सब्सिडी मिलने के बाद किसान को अपनी जेब से बहुत कम हिस्सा लगाना पड़ता है, बाकी पैसा बैंक लोन और सरकारी अनुदान से कवर हो जाता है।

आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज (Documents Required)

सब्सिडी प्रक्रिया शुरू करने से पहले आपके पास निम्नलिखित कागज तैयार होने चाहिए:

  • आधार कार्ड (मोबाइल नंबर लिंक होना चाहिए)
  • पैन कार्ड
  • खेत के कागजात (खसरा/खतौनी की नई नकल)
  • बैंक पासबुक (जिसमें आधार लिंक हो)
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • मिट्टी और पानी की जांच रिपोर्ट (Soil & Water Test Report)
  • शपथ पत्र (Affidavit)
  • विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR - Detailed Project Report)

ध्यान दें, अगर आप किसी ऐसी जमीन पर पॉलीहाउस लगा रहे हैं जहाँ पहले से बागवानी है, जैसे कि सेब बेर की खेती, तो आपको अपनी जमीन का नक्शा (Map) भी साथ में लगाना होगा।

आवेदन प्रक्रिया: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड (Step-by-Step Process)

बहुत से किसान जानकारी के अभाव में सब्सिडी नहीं ले पाते। यहाँ आसान शब्दों में पूरी प्रक्रिया समझें:

स्टेप 1: जिला उद्यान विभाग में संपर्क करें

सबसे पहले अपने जिले के जिला उद्यान अधिकारी (District Horticulture Officer - DHO) के कार्यालय जाएं। वहां से पता करें कि वर्तमान में आपके जिले में पॉलीहाउस का लक्ष्य (Target) आया है या नहीं।

स्टेप 2: ऑनलाइन पंजीकरण (Registration)

अधिकांश राज्यों में अब आवेदन ऑनलाइन होते हैं। उदाहरण के लिए:

  • मध्य प्रदेश: MPFSTS पोर्टल पर
  • राजस्थान: राज किसान साथी पोर्टल पर
  • बिहार: बागवानी मिशन की वेबसाइट पर
  • हरियाणा: Hornet पोर्टल पर

अपनी राज्य सरकार की बागवानी वेबसाइट पर जाकर पंजीकरण करें।

स्टेप 3: प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) और फाइल जमा करना

आपको एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) या पेशेवर सलाहकार से अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) बनवानी होगी। इसमें यह बताया जाता है कि लागत कितनी आएगी और आप कमाई कैसे करेंगे। यह फाइल विभाग में जमा करें।

Polyhouse Farming Conclusion

स्टेप 4: प्रशासनिक स्वीकृति (LoI)

अगर आपके कागज सही पाए जाते हैं, तो विभाग आपको 'प्रशासनिक स्वीकृति' (Letter of Intent) जारी करता है। इसका मतलब है कि सरकार ने आपकी सब्सिडी मंजूर कर ली है और अब आप काम शुरू कर सकते हैं।

स्टेप 5: बैंक लोन और निर्माण

स्वीकृति पत्र मिलने के बाद आप बैंक से लोन ले सकते हैं। इसके बाद आपको सरकार द्वारा अधिकृत (Authorized) कंपनियों से ही पॉलीहाउस बनवाना होता है। खुद बनाने पर कई बार सब्सिडी अटक सकती है।

स्टेप 6: भौतिक सत्यापन और पैसा आना

पॉलीहाउस बनने के बाद अधिकारियों की टीम आपके खेत पर आकर निरीक्षण (Verification) करेगी। सब कुछ सही पाए जाने पर सब्सिडी की राशि सीधे आपके बैंक खाते (DBT) में भेज दी जाती है।

पॉलीहाउस में कौन सी फसलें उगाएं?

पॉलीहाउस तो बन गया, लेकिन उसमें सही फसल नहीं लगाई तो नुकसान हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, निम्नलिखित फसलों का चुनाव करें:

  • विदेशी सब्जियां: रंगीन शिमला मिर्च, ब्रोकली, चेरी टमाटर।
  • बेल वाली सब्जियां: खीरा (सीडलेस वैरायटी), जो खुले खेत के खीरे से 3 गुना महंगा बिकता है।
  • फूलों की खेती: जरबेरा, गुलाब और कार्नेशन। शादियों के सीजन में ये बहुत महंगे बिकते हैं।
  • नर्सरी तैयार करना: आप पॉलीहाउस में दूसरी फसलों जैसे चुकंदर या पपीते की स्वस्थ पौध तैयार करके भी बेच सकते हैं।

निष्कर्ष

पॉलीहाउस खेती एक तकनीक है, जादू नहीं। इसमें सफलता के लिए आपको तकनीकी ज्ञान होना बहुत जरूरी है।

  • सरकार द्वारा रजिस्टर्ड कंपनी से ही ढांचा बनवाएं।
  • मिट्टी की जांच जरूर करवाएं।
  • बाजार (Market) पहले ढूंढें, फसल बाद में उगाएं।

पॉलीहाउस सब्सिडी योजना का लाभ उठाकर आप खेती को एक मुनाफेदार बिजनेस में बदल सकते हैं। सही जानकारी और सही दिशा ही किसान की असली ताकत है।

क्या आपके मन में कोई सवाल है? नीचे कमेंट करें या अधिक जानकारी के लिए हमारे वीडियो देखें।

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डिस्क्लेमर: सब्सिडी के नियम और प्रतिशत समय-समय पर राज्य सरकारों द्वारा बदले जा सकते हैं। नवीनतम जानकारी के लिए अपने जिले के उद्यान विभाग से संपर्क जरूर करें।

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