सारांश: एपल बेर (Apple Ber) शुष्क क्षेत्रों के लिए 'वरदान' है। इसे "गरीब का सेब" भी कहा जाता है। कम पानी और बंजर जमीन में भी यह बंपर मुनाफा देता है।

शुष्क क्षेत्र की बागवानी में बेर का प्रमुख स्थान है। वर्षा आधारित खेती में बेर एक ऐसा फलदार पेड़ है जो एक बार स्थापित होने के बाद कम पानी में भी शानदार उत्पादन देता है। यह अकाल और सूखे की स्थिति से निपटने के लिए किसानों का सबसे अच्छा साथी है।

🌳 एपल बेर की खासियतें (Why Apple Ber?)
  • हाइब्रिड और जैविक: यह उच्च व्यावसायिक मूल्य वाला पौधा है।
  • बहुउपयोगी: फलों के अलावा इसकी पत्तियां पशुओं के लिए पौष्टिक चारा देती हैं और कांटेदार झाड़ियां खेत की बाड़ (Fencing) के काम आती हैं।
  • तुलना: इसमें सेब (Apple) के बराबर ही न्यूट्रीशंस और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं।
  • विटामिन का खजाना: विटामिन सी, कैल्शियम, खनिज लवण और फॉस्फोरस से भरपूर।
🌦️ जलवायु और मिट्टी (Climate & Soil)

बेर की खेती ऊष्ण व उपोष्ण जलवायु में आसानी से की जा सकती है। इसमें सूखा सहन करने की गजब की क्षमता होती है।

  • तापमान: यह पौधा 50 डिग्री तक की गर्मी सहन कर सकता है। गर्मियों में पत्तियां झड़ जाती हैं जिससे पानी की जरूरत कम हो जाती है।
  • सावधानी: यह पाले (Frost) के प्रति संवेदनशील है, अतः जहाँ बहुत ज्यादा पाला पड़ता हो, वहां सावधानी बरतें।
  • मिट्टी: यह बलुई दोमट मिट्टी से लेकर कंकरीली, पथरीली, लवणीय और क्षारीय भूमि (Usar Land) में भी हो सकता है। इसे बंजर जमीन का सोना भी कहते हैं।
🌱 उन्नत किस्में: थाई एपल बेर (Thai Apple Ber)

यह एक हाइब्रिड किस्म है जो बहुत तेजी से बढ़ती है।

  • उत्पादन: लगाने के 6 महीने बाद ही फल लगने शुरू हो जाते हैं। (लेकिन पहले साल पेड़ छोटा होने पर फल न लें तो बेहतर है)।
  • मुनाफा: एक साल बाद एक पेड़ 50 से 100 किलो तक फल दे सकता है।
  • फल का आकार: एक फल का वजन 50 से 125 ग्राम तक होता है।
  • कांटे कम: इसमें कांटे नहीं के बराबर होते हैं, जिससे तुड़ाई आसान होती है।
  • उम्र: यह पेड़ 20-30 साल तक लगातार आमदनी देता है।
🚜 खेत की तैयारी और रोपाई (Plantation)
गड्ढे का आकार: 2 फीट चौड़ा x 2 फीट लंबा x 2 फीट गहरा।

गड्ढा भरना: गड्ढा खोदकर 20 दिन धूप लगने दें। फिर सड़ी हुई गोबर की खाद, नीम/आकड़े की पत्तियां और ऊपरी मिट्टी मिलाकर गड्ढा भर दें।

पौधे से पौधे की दूरी:

  • केवल एपल बेर के लिए: 15 x 15 फीट
  • मिश्रित खेती के लिए: 20 x 20 फीट
  • मेढ़ पर लगाने के लिए: 13 x 13 फीट

एक बीघा में लगभग 80 पौधे लगाए जा सकते हैं। बीच की खाली जगह में आप मटर, मिर्च, बैंगन या मूंग की खेती कर सकते हैं।

✂️ पौध तैयार करना (Propagation & Grafting)

बेर के पौधे बीज से तैयार मूलवृंत (Rootstock) पर चश्मा चढ़ाकर (Budding) या ग्राफ्टिंग से तैयार किए जाते हैं।

  • मूलवृंत: इसके लिए देसी या जंगली बेर (Ziziphus rotundifolia) की गुठली का उपयोग होता है।
  • बीज बुवाई: मार्च-अप्रैल में बीज बोए जाते हैं। गुठली को फोड़कर बीज निकालने से अंकुरण जल्दी (1 हफ्ते में) होता है।
  • बडिंग (Budding) का समय: 15 जून से 15 सितम्बर तक चश्मा चढ़ाने का काम सबसे अच्छा होता है।
  • तरीका: पैबंदी (Patch Budding) या रिंग बडिंग का इस्तेमाल किया जाता है।
शीर्ष रोपण (Top Working): अगर आपके खेत में पुराने जंगली बेर के पेड़ हैं, तो उन्हें काटकर नई हाइब्रिड कलम लगाकर उन्हें एपल बेर में बदला जा सकता है।
✂️ कटाई और छंटाई (Pruning) - सबसे जरूरी काम

बेर में फल हमेशा नई टहनियों पर आते हैं, इसलिए हर साल कटाई-छंटाई करना अनिवार्य है।

  • सही समय: मई का महीना (जब पौधे पत्ती विहीन होते हैं)।
  • कैसे करें: एक साल पुरानी शाखाओं का 25% से 50% हिस्सा काट देना चाहिए। सुखी और बीमार टहनियां पूरी तरह हटा दें।
  • फायदा: इससे नई फूटान होगी और फलों का आकार व संख्या बढ़ेगी।
💧 सिंचाई और खाद (Irrigation & Fertilizer)
  • सिंचाई: पौधा स्थापित होने तक 15-20 दिन में पानी दें। बाद में यह वर्षा आधारित हो जाता है। फल बनते समय (अक्टूबर-जनवरी) सिंचाई करने से फलों का आकार बड़ा होता है।
  • खाद (प्रति पेड़):
    • गोबर की खाद: 40-50 किलो
    • यूरिया: 1.5 से 2.5 किलो (दो भागों में दें - आधी जून-जुलाई में, आधी फल सेट होने के बाद)।
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