सारांश: पपीता क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का पांचवा सबसे लोकप्रिय फल है। यह स्वास्थ्य के लिए जितना अच्छा है, किसान की जेब के लिए भी उतना ही फायदेमंद है। इसकी फसल सबसे कम दिनों में तैयार हो जाती है।
पपीता विटामिन A और C का खजाना है। इसमें 'पपेन' (Papain) नामक एंजाइम होता है जो शरीर की चर्बी घटाने और भोजन पचाने में मदद करता है। इसका उपयोग खाद्य प्रसंस्करण और कपड़ा उद्योग में भी होता है।
🌤️ उपयुक्त समय और जलवायु
- तापमान: 10°C से 40°C तापमान सबसे अच्छा है।
- बुवाई का समय: फरवरी-मार्च से लेकर मई-अक्टूबर के बीच।
- विशेषता: यह बारहों महीने फल देने वाली फसल है।
🌱 मिट्टी और खेत की तैयारी
सबसे जरूरी बात: पपीते के खेत में पानी का जमाव (Waterlogging) बिल्कुल नहीं होना चाहिए, वरना पौधे मर जाते हैं।
- मिट्टी: बलुई दोमट (Sandy Loam) मिट्टी सर्वोत्तम है।
- pH मान: 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए।
- तैयारी: खेत की गहरी जुताई करें और खरपतवार पूरी तरह साफ कर दें।
🌳 उन्नत किस्में (Varieties)
किस्मों का चुनाव अपने उद्देश्य के अनुसार करें:
- खाने के लिए (Table Varieties): बड़वानी लाल, Red lady 786, मधुबिंदु, कुर्ग हानिड्यू।
- हाइब्रिड किस्में (उभयलिंगी): पूसा नन्हा, पूसा डिलीशियस, पूसा मैजेस्टी, CO-7.
- पपेन (औद्योगिक) के लिए: ओ-2, ओ-5, सी.ओ-7.
🚜 नर्सरी और रोपाई (Nursery Process)
बीजों को सीधे खेत में न लगाकर पहले नर्सरी तैयार करें:
- कतार: जमीन से 15 सेमी ऊँची और 1 मीटर चौड़ी क्यारियां बनाएं।
- बीज उपचार: बीजों को बोने से पहले 0.1% कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (Copper Oxychloride) के घोल से उपचारित करें।
- बुवाई: बीज को आधा इंच गहराई पर बोएं और गोबर की खाद से ढक दें।
- रोपाई का समय: जब पौधे में 4-5 पत्तियां आ जाएं (लगभग 2 महीने बाद), तब खेत में लगाएं।
गड्ढे और दूरी: मई के महीने में 2 x 2 मीटर की दूरी पर 50 x 50 x 50 सेमी के गड्ढे खोदें। गड्ढे में 50 ग्राम एल्ड्रिन (कीटनाशक) और गोबर की खाद भरकर पौधा लगाएं।
💊 खाद और उर्वरक (Fertilizers)
अच्छी उपज के लिए प्रति पौधा निम्न मात्रा दें:
- नाइट्रोजन: 200 ग्राम
- फॉस्फोरस: 200 ग्राम
- पोटाश: 400 ग्राम
नोट: इस मात्रा को 50-60 दिनों के अंतराल में बांटकर दें। रोपाई के 4 महीने बाद खाद देना शुरू करें।
⚠️ रोग और उनका इलाज (Disease Control)
पपीते में मोजैक, लीफ कर्ल, जड़ सड़न और निमेटोड की समस्या आती है।
| समस्या | उपचार (Dose) |
|---|---|
| सड़न/गलन | बोर्डो मिक्सचर (5:5:20) का लेप लगाएं। |
| फफूंदी रोग | मैन्कोजेब (0.2%) या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (3 ग्राम/लीटर) का छिड़काव। |
| कीट (माहू) | डाईमेथोएट 30 ई.सी. (1.5 मिली/लीटर) का छिड़काव। |
| निमेटोड | इथिलियम डाइब्रोमाइड (3 किग्रा/हेक्टेयर) डालें और गेंदा का फूल साथ में लगाएं। |
💰 तुड़ाई और उत्पादन
- समय: 10 से 12 महीने में फल तैयार हो जाते हैं।
- पहचान: जब फल का रंग हरे से पीला होने लगे और नाखून मारने पर दूध की जगह पानी जैसा तरल निकले, तो समझें फल तैयार है।
- सावधानी: फलों को पकने से थोड़ा पहले तोड़ें ताकि चिड़ियाँ नुकसान न पहुंचाएं और भंडारण में सड़न न हो।
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