सारांश: एलोवेरा (घृतकुमारी) को "संजीवनी" कहा जाता है। यह दवाइयों से लेकर कॉस्मेटिक (सौंदर्य) उत्पादों में बहुत ज्यादा इस्तेमाल होता है। सबसे खास बात—इसे कोई जानवर नहीं खाता और यह बंजर जमीन पर भी उग जाता है।

प्राचीन समय से ही एलोवेरा का उपयोग बीमारियों को ठीक करने में किया जा रहा है। एक बार लगाने पर यह 3 से 5 साल तक लगातार फसल देता है।

इसे आप खेत की मेड़ (Boundary) पर भी लगा सकते हैं, जिससे:

  • आवारा पशु खेत में नहीं घुसेंगे (सुरक्षा)।
  • अतिरिक्त आमदनी (Extra Income) होगी।
  • मेड़बंदी मजबूत हो जाएगी।
🌱 उपयुक्त मिट्टी और किस्में
  • मिट्टी: वैसे तो यह किसी भी मिट्टी में हो सकता है, लेकिन बलुई दोमट मिट्टी (Sandy Loam) में सबसे ज्यादा उत्पादन मिलता है।
  • उन्नत किस्में: सिम-सीतल (Sim-Sheetal), एल-1, 2, 5 और 49. (ये किस्में ज्यादा जैल देती हैं)।
🚜 खेत की तैयारी और रोपाई

खेत को समतल करके ऊँची क्यारियां बना लें।

  • दूरी: पौधे से पौधे की दूरी 50 सेमी और लाइन से लाइन की दूरी भी 50 सेमी रखें।
  • पौधों की संख्या: एक हेक्टेयर में लगभग 45,000 से 50,000 पौधों की जरूरत होती है।
  • सही समय: सिंचित (पानी वाली) जगहों पर फरवरी में लगाएं, वैसे इसे साल भर कभी भी लगाया जा सकता है।
💊 खाद और सिंचाई (Fertilizer & Irrigation)
खाद (प्रति हेक्टेयर):
  • गोबर की खाद: 10-12 टन
  • यूरिया: 120 किलो (तीन किस्तों में)
  • फॉस्फोरस: 150 किलो
  • पोटाश: 33 किलो

सिंचाई: साल भर में सिर्फ 3-4 सिंचाई की जरूरत होती है। ड्रिप या स्प्रिंकलर सिस्टम सबसे अच्छा है।

सावधानी: खेत में पानी भरकर खड़ा नहीं रहना चाहिए, वरना तना सड़ जाएगा। जलनिकासी का इंतजाम पक्का रखें।

⚠️ रोग और देखभाल

एलोवेरा में बीमारी बहुत कम लगती है। कभी-कभी ज्यादा पानी से जड़ सड़न या फफूंदी (Fungus) लग सकती है।

  • इलाज: मैंकोजेब (Mancozeb) या रिडोमिल (Ridomil) 2 से 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
  • समय-समय पर खरपतवार निकालते रहें।
💰 कटाई और कमाई (Harvesting & Profit)
  • पहली कटाई: लगाने के 10-15 महीने बाद।
  • तरीका: हमेशा नीचे की पुरानी (मोटी) 3-4 पत्तियां ही काटें, ऊपर की नई पत्तियां छोड़ दें।
  • दोबारा कटाई: हर 45 दिन बाद फिर से पत्तियां काट सकते हैं।
कमाई का गणित:
एक एकड़ से आप आसानी से 3 से 5 लाख रुपये सालाना कमा सकते हैं। बाजार में पत्तियां 3 से 6 रुपये किलो तक बिकती हैं।
"खेती और किसान - देश की पहचान"
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