ईरानी अकरकरा की खेती कैसे करें (akarkara farming guide in Hindi )

ईरानी अकरकरा की खेती कैसे करें (akarkara farming guide in Hindi )

Irani Akarkara Farming

ईरानी अकरकरा की खेती: 6 महीने में 6 लाख की कमाई (Akarkara Farming Mega Guide 2026)

भारत में औषधीय फसलों (Medicinal Crops) की खेती अब किसानों के लिए मुनाफे का नया जरिया बन गई है। इनमें से एक सबसे खास फसल है—ईरानी अकरकरा (Irani Akarkara)

अश्वगंधा की तरह ही अकरकरा भी एक ऐसी फसल है जिसे जानवर नहीं खाते और इसमें लागत बहुत कम आती है। इसकी जड़ों का उपयोग दाँत दर्द, नसों की कमजोरी और कामोत्तेजक दवाओं में किया जाता है, जिसके कारण इसकी कीमत बाजार में हमेशा ऊंची रहती है।

आज के इस विस्तृत लेख (Mega Guide) में हम आपको अकरकरा की खेती की पूरी जानकारी, बीज दर और मुनाफे का गणित बताएंगे।

🌟 बंजर जमीन से सोना: किसान रामेश्वर की कहानी

मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के किसान श्री रामेश्वर पाटीदार के पास 2 एकड़ पथरीली जमीन थी। पानी की कमी के कारण सोयाबीन और चने की फसल अक्सर खराब हो जाती थी। उन्होंने 2019 में प्रयोग के तौर पर 1 एकड़ में 'ईरानी अकरकरा' लगाया।

उन्होंने अक्टूबर में बुवाई की और मार्च में फसल की खुदाई की। उन्होंने देखा कि इस फसल को न तो जानवरों ने नुकसान पहुंचाया और न ही किसी बीमारी ने।

परिणाम: 6 महीने में उन्हें 1 एकड़ से 8 क्विंटल सूखी जड़ें मिलीं। नीमच मंडी में उनकी जड़ें 25,000 रुपये प्रति क्विंटल बिकीं। साथ ही उन्हें 1 क्विंटल बीज भी मिला जिसकी कीमत 2 लाख रुपये थी। कुल मिलाकर उन्होंने एक सीजन में 4 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया।

1. अकरकरा की खेती के फायदे (Why Choose Akarkara?)

  • सुरक्षा: इसकी पत्तियों में एक खास गंध होती है, इसलिए नीलगाय, सुअर या अन्य जानवर इसे नहीं खाते। तारबंदी का खर्च बच जाता है।
  • कम पानी: इसे पूरे जीवनकाल में 5-6 सिंचाइयों की ही जरूरत होती है।
  • दोहरा मुनाफा: इसकी जड़ें तो महंगी बिकती ही हैं, इसका बीज (Seed) भी 20,000 से 30,000 रुपये किलो तक बिकता है।
  • कम लागत: इसमें रसायनिक खाद और कीटनाशकों की जरूरत न के बराबर होती है।

2. उपयुक्त जलवायु और मिट्टी (Climate & Soil)

अकरकरा रबी (सर्दी) के मौसम की फसल है।

(A) जलवायु

अच्छी पैदावार के लिए धूप वाला मौसम और ठंडी रातें उपयुक्त होती हैं। अधिक बारिश या जलभराव इसे नुकसान पहुंचाता है।

(B) मिट्टी

  • बलुई दोमट (Sandy Loam): सबसे अच्छी मानी जाती है क्योंकि इसमें जड़ें गहराई तक जाती हैं और मोटी होती हैं।
  • pH मान: 6.0 से 7.5 के बीच।
  • जल निकासी: खेत में पानी नहीं भरना चाहिए, वरना जड़ें काली पड़कर सड़ जाती हैं।

3. बुवाई का समय और तरीका (Sowing Method)

सही समय: अकरकरा की बुवाई अक्टूबर से नवंबर के बीच की जाती है। ज्यादा ठंड (दिसंबर) में बुवाई करने से अंकुरण कम होता है।

बीज दर: एक एकड़ के लिए 3 से 4 किलो बीज पर्याप्त होता है।

बुवाई की विधि:

  1. खेत को अच्छी तरह जोतकर भुरभुरा बना लें।
  2. बीजों को सीधे खेत में छिड़काव विधि (Broadcasting) से या कतारों में बोया जा सकता है।
  3. कतार से कतार की दूरी 30 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 10 सेमी रखें।
  4. बीज बहुत हल्का होता है, इसलिए इसे ज्यादा गहरा न दबाएं। ऊपर से हल्की मिट्टी या गोबर की खाद बुरक दें।

4. सिंचाई और देखभाल (Irrigation & Care)

  • सिंचाई: बुवाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई (फव्वारा विधि सबसे अच्छी है) करें। इसके बाद 20-25 दिन के अंतराल पर पानी देते रहें। खुदाई से 15 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें ताकि जड़ें सख्त हो जाएं।
  • निराई-गुड़ाई: बुवाई के 25-30 दिन बाद पहली निराई करें। खरपतवार निकालने से जड़ों का विकास तेजी से होता है।

5. खुदाई और बीज उत्पादन (Harvesting)

फसल 6 से 7 महीने (मार्च-अप्रैल) में पककर तैयार हो जाती है।
बीज की कटाई: मार्च में जब फूल सूखने लगें, तो उन्हें ऊपर से काट लें और छाया में सुखाकर बीज निकाल लें। एक एकड़ से 1-1.5 क्विंटल बीज मिलता है।
जड़ों की खुदाई: बीज लेने के बाद खेत की जुताई करके जड़ें निकाल लें। जड़ों को साफ करके 4-5 दिन धूप में सुखाएं।

💡 प्रो टिप (ग्रेडिंग): सूखी जड़ों को ग्रेडिंग करके बेचें। मोटी और सफेद जड़ों का भाव सबसे ज्यादा (30,000+ रुपये/क्विंटल) मिलता है, जबकि पतली जड़ों का भाव कम होता है।

6. लागत और मुनाफे का गणित (Cost & Profit Analysis)

आइये 1 एकड़ अकरकरा की खेती का अर्थशास्त्र समझते हैं:

विवरण अनुमानित खर्च/आय
कुल लागत (बीज, खाद, खुदाई) ₹20,000 - ₹25,000
सूखी जड़ों का उत्पादन 8 से 10 क्विंटल
जड़ों का औसत भाव ₹20,000 प्रति क्विंटल
जड़ों से आय ₹1,60,000 - ₹2,00,000
बीज से आय (1 क्विंटल) ₹1,00,000 - ₹1,50,000
कुल शुद्ध मुनाफा ₹2.5 लाख से ₹3.5 लाख

निष्कर्ष (Conclusion)

किसान भाइयों, अकरकरा की खेती (Akarkara Farming) एक 'छुपा रुस्तम' फसल है। इसमें रिस्क कम है और रिटर्न बहुत ज्यादा। अगर आप थोड़ी सी मेहनत और सही तकनीक का इस्तेमाल करें, तो यह फसल आपको पारंपरिक खेती के मुकाबले 5 गुना ज्यादा मुनाफा दे सकती है। इसकी मंडी नीमच (म.प्र.) में है, जहाँ आप आसानी से उपज बेच सकते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ - Akarkara Farming)

Q1. अकरकरा की जड़ें कहाँ बिकती हैं?

उत्तर: भारत में अकरकरा की सबसे बड़ी मंडी नीमच (मध्य प्रदेश) में है। इसके अलावा दिल्ली की खारी बावली और आयुर्वेदिक कंपनियां भी इसे खरीदती हैं।

Q2. क्या अकरकरा के बीज घर पर तैयार कर सकते हैं?

उत्तर: जी हाँ, पहली बार बीज खरीदने के बाद आप अपनी फसल से ही अगली साल के लिए बीज तैयार कर सकते हैं। इसके बीजों की कीमत बहुत ज्यादा होती है, इसलिए यह भी एक बड़ी कमाई है।

Q3. क्या बारिश में अकरकरा लगा सकते हैं?

उत्तर: नहीं, बारिश में इसकी जड़ें गल जाती हैं। इसे रबी सीजन (सर्दी) में ही लगाना चाहिए।

Q4. एक एकड़ में कितना मुनाफा हो सकता है?

उत्तर: अगर जड़ और बीज दोनों का उत्पादन अच्छा हो, तो एक एकड़ से आसानी से 2.5 लाख से 4 लाख रुपये तक कमाए जा सकते हैं।

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