चने की खेती: कम लागत, बंपर मुनाफा (संपूर्ण गाइड)
किसान भाइयों, रबी के सीजन में अगर कोई फसल सबसे कम पानी और कम मेहनत में तैयार होती है, तो वह है चना (Chickpea)। भारत दलहन उत्पादन में पूरी दुनिया में नंबर 1 है, और इसमें चने का योगदान सबसे बड़ा है।
आज के इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि कैसे आप वैज्ञानिक तरीके से चने की खेती करके अपनी पैदावार को दोगुना कर सकते हैं। इस गाइड में हम मिट्टी की जांच से लेकर मंडी में बेचने तक का पूरा सफर तय करेंगे।
1. चने की खेती के लिए सही समय और जलवायु
चना एक ठंडे मौसम की फसल है।
- बुवाई का समय: चने की बुवाई का सबसे सही समय 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच होता है। अगर आप पछेती खेती कर रहे हैं, तो दिसंबर के पहले हफ्ते तक बुवाई कर सकते हैं।
- तापमान: बुवाई के समय 20°C से 25°C और फसल पकते समय 15°C से 20°C तापमान सबसे अच्छा माना जाता है।
- मिट्टी: चने के लिए दोमट (Loam) या मटियार (Clay) मिट्टी, जिसमें जल निकासी (Drainage) अच्छी हो, सबसे उपयुक्त होती है। ज्यादा रेतीली या क्षारीय मिट्टी में चना अच्छा नहीं होता।
2. खेत की तैयारी और बीज दर (Field Prep)
एक बंपर फसल की नींव खेत की तैयारी पर टिकी होती है।
- जुताई: पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें। उसके बाद 2-3 बार कल्टीवेटर चलाएं और पाटा लगाकर खेत को समतल कर लें।
बीज दर (Seed Rate):
- देसी चना (Desi Chana): 70-80 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर।
- काबुली चना (Kabuli Chana): 90-100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर।
- बुवाई की दूरी: कतार से कतार (Line to Line) की दूरी 30 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 10 सेमी रखें।
3. बीज उपचार: सबसे ज़रूरी कदम
- विधि: बुवाई से पहले बीजों को कार्बेन्डाजिम (Carbendazim) या ट्राइकोडर्मा (Trichoderma) से 2-3 ग्राम प्रति किलो बीज के हिसाब से उपचारित करें।
- राइजोबियम कल्चर: बीज को राइजोबियम कल्चर से उपचारित करने पर जड़ों में नाइट्रोजन की गांठें अच्छी बनती हैं, जिससे यूरिया की ज़रूरत कम पड़ती है।
4. उन्नत किस्में (Top Varieties)
अपने क्षेत्र के हिसाब से सही किस्म का चुनाव करें:
- देसी किस्में: पूसा-362, जी.एन.जी-1581, जे.जी-11 (JG-11)।
- काबुली किस्में: पूसा-1003, काक-2 (KAK-2)।
- उकठा प्रतिरोधी: अवरोधी, विजय।
5. खाद और उर्वरक प्रबंधन
चना एक दलहनी फसल है, इसलिए इसे नाइट्रोजन की कम और फास्फोरस की ज्यादा ज़रूरत होती है।
- DAP: 80-100 किलो प्रति हेक्टेयर।
- सल्फर: 20 किलो प्रति हेक्टेयर (दानेदार)।
- पोटाश: अगर मिट्टी में कमी हो तो 20 किलो प्रति हेक्टेयर डालें।
6. सिंचाई प्रबंधन (Irrigation)
चने को पूरी फसल अवधि में केवल 2-3 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है।
- पहली सिंचाई: बुवाई के 30-35 दिन बाद (शाखाएं बनते समय)।
- दूसरी सिंचाई: फूल आने से पहले (अगर ज़रूरत हो)।
सावधानी: फूल आते समय (Flowering Stage) सिंचाई न करें, वरना फूल झड़ सकते हैं। - तीसरी सिंचाई: फलियां (Pods) बनते समय।
7. खरपतवार और रोग नियंत्रण
- खरपतवार: बुवाई के 2 दिन के अंदर पेंडिमेथालिन (Pendimethalin) का छिड़काव करें। बाद में 25-30 दिन पर एक निराई-गुड़ाई (Hand Weeding) ज़रूर करें।
इल्ली का हमला (Pod Borer) - चने का सबसे बड़ा दुश्मन!
- उपाय 1 (जैविक): खेत में 'T' आकार की खूंटियां लगाएं (ताकि पक्षी उन पर बैठकर इल्ली खाएं)।
- उपाय 2: फेरोमोन ट्रैप (Pheromone Trap) लगाएं।
- उपाय 3 (रासायनिक): अगर प्रकोप ज्यादा हो तो इमामेक्टिन बेंजोएट (Emamectin Benzoate) 5% SG का छिड़काव करें।
8. कटाई और गहाई (Harvesting)
जब चने की पत्तियां लाल-पीली पड़ जाएं और तना सूखने लगे, तब फसल कटाई के लिए तैयार है। काटने के बाद फसल को 5-6 दिन धूप में अच्छी तरह सुखाएं और फिर थ्रेशर से गहाई कर लें।
9. लागत और मुनाफा (Cost & Profit)
| विवरण (Particulars) | अनुमानित राशि (प्रति एकड़) |
|---|---|
| कुल लागत | ₹15,000 - ₹20,000 |
| औसत उत्पादन | 8-12 क्विंटल |
| बाज़ार भाव | ₹5,000 - ₹6,000 / क्विंटल |
| शुद्ध मुनाफा (Net Profit) | ₹40,000 - ₹50,000 |
निष्कर्ष (Conclusion)
किसान भाइयों, चने की खेती कम संसाधनों में ज्यादा मुनाफा देने वाला सौदा है। बस ज़रूरत है सही समय पर सही देखभाल की। अगर आपको अपनी फसल में कोई रोग दिखे, तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें।
क्या आप भी चने की खेती करते हैं? अपने अनुभव या सवाल नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर लिखें! 👇
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