अश्वगंधा की खेती: बंजर जमीन से लाखों की कमाई | Ashwagandha Farming in Hindi

Ashwagandha Farming in Hindi - Kheti Aur Kisan

अश्वगंधा की खेती: बंजर जमीन से लाखों की कमाई का राज | Ashwagandha Farming in Hindi

किसान भाइयों, नमस्कार! स्वागत है आपका Kheti Aur Kisan में।

आज हम एक ऐसी फसल के बारे में बात करेंगे जिसे न तो जानवर खाते हैं, न ही इसमें ज्यादा पानी की जरूरत होती है और न ही इसमें बीमारियां लगती हैं। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं अश्वगंधा (Ashwagandha) की, जिसे 'इंडियन जिनसेंग' भी कहा जाता है।

खास बात: अश्वगंधा की जड़ों की मांग विदेशों तक है और इसका भाव मंडी में ₹20,000 से लेकर ₹50,000 प्रति क्विंटल तक मिल जाता है।

1. अश्वगंधा के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी (Soil & Climate)

अश्वगंधा मूल रूप से सूखे क्षेत्रों की फसल है। जहाँ पानी की कमी है, वहां यह वरदान है।

  • मिट्टी: इसके लिए बलुई दोमट (Sandy Loam) या हल्की लाल मिट्टी सबसे अच्छी होती है।
  • pH मान: मिट्टी का pH 7.5 से 8.0 के बीच होना चाहिए।
  • जल निकासी: खेत में पानी नहीं भरना चाहिए, वरना जड़ें गल सकती हैं।

2. बुवाई का सही समय और बीज दर (Sowing Time)

अश्वगंधा खरीफ के अंत और रबी की शुरुआत में लगाई जाने वाली फसल है।

  • सही समय: अगस्त का आखिरी सप्ताह से लेकर सितंबर का पूरा महीना सबसे उपयुक्त है। पछेती खेती अक्टूबर तक की जा सकती है।
  • बीज दर: एक एकड़ खेत के लिए 4 से 5 किलो बीज पर्याप्त होता है।
  • उन्नत किस्में: जवाहर असगंध-20 (Jawahar Asgandh-20), पोषिता (Poshita), और रक्षिता प्रमुख किस्में हैं।

3. खेत की तैयारी और बुवाई की विधि

बुवाई से पहले खेत की 2-3 बार अच्छी जुताई करें और पाटा लगाकर समतल कर लें। बुवाई आप छिटकवां विधि (Broadcasting) या कतार विधि (Line Sowing) से कर सकते हैं। कतार से कतार की दूरी 30 सेमी रखें।

4. सिंचाई और खाद (Irrigation & Fertilizer)

अश्वगंधा को 'कम खर्च वाली फसल' इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें रासायनिक खादों की ज्यादा जरूरत नहीं होती।

  • खाद: खेत तैयार करते समय 10-15 टन सड़ी हुई गोबर की खाद डालें। रसायनिक खाद में डीएपी का प्रयोग सीमित मात्रा में करें।
  • सिंचाई: पहली सिंचाई बुवाई के 30-35 दिन बाद करें। पूरी फसल अवधि में मात्र 2-3 पानी की आवश्यकता होती है। अगर बारिश हो जाए, तो सिंचाई न करें।

5. फसल की खुदाई और पहचान (Harvesting)

अश्वगंधा की फसल 150 से 180 दिनों में तैयार हो जाती है (जनवरी से मार्च के बीच)।

पकने की पहचान: जब पौधे की पत्तियां पीली पड़कर सूखने लगें और लाल रंग के फल (Berries) दिखाई देने लगें, तो समझें फसल तैयार है। जड़ सहित पौधे को उखाड़ लें और जड़ को तने से अलग कर लें।

6. लागत और मुनाफे का गणित (Profit Analysis)

आइए, एक एकड़ का अनुमानित हिसाब देखते हैं:

विवरण (Particulars) अनुमानित मात्रा/राशि
कुल लागत (बीज, जुताई, खुदाई) ₹10,000 - ₹15,000
सूखी जड़ों का उत्पादन 3 - 4 क्विंटल/एकड़
बाजार भाव (औसत) ₹25,000 - ₹40,000/क्विंटल
बीज और भूसा की आय ₹5,000 - ₹10,000
शुद्ध मुनाफा (Net Profit) ₹80,000 - ₹1,00,000+

निष्कर्ष (Conclusion)

किसान भाइयों, अगर आप पारंपरिक खेती से हटकर कुछ नया करना चाहते हैं और आपके पास सिंचाई की सुविधा कम है, तो अश्वगंधा एक बेहतरीन विकल्प है।

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