शतावरी की खेती: एक बार लगाएं, 18 महीने में लाखों कमाएं (Shatavari Farming Mega Guide 2026)
औषधीय फसलों (Medicinal Crops) में शतावरी (Shatavari) का स्थान बहुत ऊंचा है। इसे 'जड़ी-बूटियों की रानी' भी कहा जाता है। आयुर्वेद में इसका उपयोग महिलाओं के स्वास्थ्य, शक्तिवर्धक टॉनिक और च्यवनप्राश बनाने में होता है।
शतावरी की खेती (Shatavari Ki Kheti) किसानों के लिए एक सुरक्षित निवेश है क्योंकि इसकी जड़ें खराब नहीं होतीं और बाजार में मांग हमेशा बनी रहती है। अगर आप 18 महीने धैर्य रख सकते हैं, तो यह फसल आपको पारंपरिक खेती से 5 गुना ज्यादा मुनाफा दे सकती है।
उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के किसान श्री रामनरेश त्रिवेदी के पास 3 एकड़ बंजर जमीन थी, जहाँ पानी की कमी थी। उन्होंने कृषि विभाग की सलाह पर वहां शतावरी लगाई।
शुरुआत में पड़ोसियों ने मज़ाक उड़ाया कि "झाड़ियां लगा रहे हो"। लेकिन 18 महीने बाद जब उन्होंने खुदाई की, तो जमीन के नीचे से सफेद सोना (शतावरी की जड़ें) निकला।
परिणाम: 1 एकड़ से उन्हें 20 क्विंटल सूखी जड़ें मिलीं। उस समय भाव 40,000 रुपये क्विंटल था। उन्होंने एक ही बार में 8 लाख रुपये कमाए। आज वे अपने जिले के 'शतावरी किंग' हैं।
1. शतावरी की खेती के फायदे (Benefits)
- उच्च मूल्य: इसकी सूखी जड़ें 30,000 से 50,000 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकती हैं।
- कम पानी: यह सूखा सहन करने वाली फसल है। 18 महीने में मात्र 5-6 बार सिंचाई की जरूरत होती है।
- जानवरों से सुरक्षा: इसकी पत्तियों में कांटे होते हैं और स्वाद कड़वा होता है, इसलिए नीलगाय या आवारा पशु इसे नहीं खाते।
- अंतरवर्तीय खेती: इसके बीच में आप दूसरी छोटी फसलें भी ले सकते हैं।
2. उपयुक्त जलवायु और मिट्टी (Climate & Soil)
शतावरी गर्म और आर्द्र जलवायु की फसल है।
(A) जलवायु
इसके लिए 20°C से 35°C तापमान सबसे अच्छा होता है। यह पाले (Frost) को भी सहन कर सकती है, लेकिन ज्यादा जलभराव से जड़ें सड़ सकती हैं।
(B) मिट्टी
- बलुई दोमट (Sandy Loam): सबसे अच्छी मानी जाती है क्योंकि इसमें कंद (जड़ें) आसानी से फैलते हैं।
- pH मान: 6.0 से 8.0 के बीच।
- जल निकासी: खेत में पानी रुकना नहीं चाहिए। ऊंची भूमि या मेड़ पर बुवाई सबसे अच्छी होती है।
3. नर्सरी तैयार करना (Nursery Preparation)
शतावरी के बीज सीधे खेत में नहीं बोए जाते। पहले नर्सरी तैयार करनी पड़ती है।
बीज दर: एक एकड़ के लिए 3 किलो बीज पर्याप्त है।
समय: अप्रैल-मई में नर्सरी डालें। बीजों को 24 घंटे गुनगुने पानी में भिगोकर बोएं। 1 महीने में पौध तैयार हो जाती है।
4. खेत की तैयारी और रोपाई (Transplanting)
खेत की तैयारी: खेत की 2-3 बार गहरी जुताई करें। मिट्टी को भुरभुरा बनाएं। आखिरी जुताई के समय 10-15 टन गोबर की खाद मिलाएं।
रोपाई का समय: जुलाई-अगस्त (मानसून) में रोपाई सबसे अच्छी होती है।
रोपाई की विधि (Spacing): कतार से कतार की दूरी 2 फीट और पौधे से पौधे की दूरी 1.5 फीट रखें। मेड़ (Ridge) बनाकर उस पर पौधे लगाना सबसे अच्छा होता है।
5. सिंचाई और देखभाल
- सिंचाई: रोपाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें। उसके बाद 20-25 दिन के अंतराल पर जरूरत के अनुसार पानी दें। गर्मियों में 10-15 दिन में सिंचाई करें।
- निराई-गुड़ाई: खरपतवार हटाने के लिए 2-3 बार निराई करें। इससे जड़ों का विकास अच्छा होता है।
- सहारा देना: शतावरी एक बेल है। अगर आप इसे बांस या तार का सहारा (Staking) देंगे, तो जड़ों का विकास और भी अच्छा होगा।
6. खुदाई और प्रसंस्करण (Harvesting & Processing)
शतावरी की फसल 18 से 20 महीने में तैयार होती है।
खुदाई: पौधों के ऊपर का हिस्सा सूखने लगे, तब जड़ों की खुदाई करें। खुदाई सावधानी से करें ताकि जड़ें टूटे नहीं।
प्रसंस्करण (Processing): यह सबसे महत्वपूर्ण चरण है। जड़ों को धोकर उनका छिलका (Peel) उतारना पड़ता है। छिलका उतारने के बाद जड़ों को छांव में सुखाएं। सूखने पर जड़ें सफ़ेद और सख्त हो जाती हैं। बिना छिलका उतारी जड़ें काली पड़ जाती हैं और उनका भाव नहीं मिलता।
7. लागत और मुनाफे का गणित (Cost & Profit Analysis)
आइये 1 एकड़ शतावरी की खेती का अर्थशास्त्र समझते हैं (18 महीने का):
| विवरण | अनुमानित खर्च/आय |
|---|---|
| बीज और पौध तैयार करना | ₹10,000 |
| खेत तैयारी और खाद | ₹15,000 |
| सिंचाई और निराई | ₹15,000 |
| खुदाई और छिलाई (लेबर) | ₹20,000 |
| कुल लागत | ₹60,000 (लगभग) |
कमाई (Income):
- गीली जड़ों का उत्पादन: 100-120 क्विंटल।
- सूखी जड़ों का उत्पादन (छिलका उतारकर): 15-20 क्विंटल।
- बाजार भाव: ₹30,000 से ₹40,000 प्रति क्विंटल।
- कुल आय: 20 क्विंटल x ₹35,000 = ₹7,00,000।
- शुद्ध मुनाफा: ₹7,00,000 - ₹60,000 = ₹6,40,000 (18 महीने में)।
निष्कर्ष (Conclusion)
किसान भाइयों, शतावरी की खेती (Shatavari Farming) धैर्य का सौदा है, लेकिन इसका फल बहुत मीठा होता है। अगर आप छिलाई और सुखाने का काम सही से कर लें, तो मंडी में व्यापारी आपके खेत से ही माल उठा लेंगे। यह फसल आपकी बंजर जमीन को भी सोने की खान बना सकती है।
खेती की ऐसी ही नई तकनीकों को वीडियो के माध्यम से देखने के लिए हमारे YouTube चैनल को अभी सब्सक्राइब करें।
📺 YouTube पर वीडियो देखें (Click Here)अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ - Shatavari Farming)
Q1. शतावरी की जड़ें कहाँ बेचें?
उत्तर: भारत में लखनऊ, कानपुर, दिल्ली और नीमच की मंडियों में शतावरी खूब बिकती है। इसके अलावा डाबर, पतंजलि और हिमालय जैसी दवा कंपनियां भी कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग कराती हैं।
Q2. क्या शतावरी की छिलाई मशीनों से हो सकती है?
उत्तर: जी हाँ, आजकल उबली हुई जड़ों को छीलने वाली मशीनें आ गई हैं, जो लेबर खर्च को बहुत कम कर देती हैं।
Q3. शतावरी की फसल कितने महीने की होती है?
उत्तर: अच्छी गुणवत्ता की जड़ें पाने के लिए फसल को कम से कम 18 से 20 महीने खेत में रखना चाहिए।
Q4. एक पौधे से कितनी जड़ें निकलती हैं?
उत्तर: एक विकसित पौधे से लगभग 500 ग्राम से 1 किलो गीली जड़ें (Tubers) प्राप्त होती हैं।
0 Comments