माइक्रोग्रीन की खेती कैसे करें | कम जगह में ज्यादा मुनाफा (Microgreen farming guide )

माइक्रोग्रीन की खेती कैसे करें | कम जगह में ज्यादा मुनाफा (Microgreen farming guide )

Microgreen Farming Guide

माइक्रोग्रीन की खेती: 10x10 के कमरे से लाखों की कमाई (Microgreen Farming Mega Guide 2026)

अगर आपके पास खेत नहीं है लेकिन आप खेती से पैसा कमाना चाहते हैं, तो माइक्रोग्रीन्स (Microgreens) आपके लिए सबसे बेहतरीन विकल्प है। इसे 'भविष्य की खेती' (Future Farming) भी कहा जाता है।

माइक्रोग्रीन्स सब्जियों के नन्हे पौधे होते हैं जिन्हें बीज उगने के 7-14 दिन बाद काट लिया जाता है। इनमें सामान्य सब्जी के मुकाबले 40 गुना ज्यादा पोषक तत्व होते हैं। इसलिए फाइव स्टार होटलों, जिम जाने वाले लोगों और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों में इसकी भारी मांग है।

🌟 छत पर खेती, लाखों में कमाई: नेहा की कहानी

बेंगलुरु की आईटी पेशेवर नेहा शर्मा ने अपनी नौकरी छोड़कर घर की छत पर माइक्रोग्रीन्स उगाना शुरू किया। उन्होंने सिर्फ 200 स्क्वायर फीट में रैक (Racks) लगाकर मूली, सरसों और ब्रोकली के माइक्रोग्रीन्स उगाए।

वे अपने ताजे माइक्रोग्रीन्स को सोशल मीडिया के जरिए सीधे ग्राहकों को बेचती हैं। 100 ग्राम का पैक 150-200 रुपये में बिकता है।

परिणाम: आज वे महीने का 50 से 60 हजार रुपये घर बैठे कमा रही हैं, वो भी बिना किसी महंगी मशीनरी के।

1. माइक्रोग्रीन्स के फायदे (Why Microgreens?)

  • सुपरफूड: इनमें विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं।
  • कम जगह: इसे आप खिड़की, बालकनी या छत पर ट्रे (Tray) में उगा सकते हैं।
  • कम समय: फसल 7 से 14 दिन में तैयार हो जाती है। यानी महीने में 3-4 बार उत्पादन।
  • ऊंची कीमत: बाजार में इसका भाव 500 रुपये से 2000 रुपये किलो तक होता है।

2. किन बीजों से उगाएं? (Popular Varieties)

आप लगभग किसी भी सब्जी या दाल के माइक्रोग्रीन्स उगा सकते हैं। सबसे लोकप्रिय हैं:

किस्म (Variety) तैयार होने का समय स्वाद
मूली (Radish) 6-7 दिन तीखा और कुरकुरा
सरसों (Mustard) 5-6 दिन तीखा
सूरजमुखी (Sunflower) 10-12 दिन नटी (Nutty) स्वाद
चुकंदर (Beetroot) 12-14 दिन मीठा और मिट्टी जैसा

3. उगाने की विधि (Step-by-Step Process)

माइक्रोग्रीन्स उगाने के लिए आपको ज्यादा तामझाम की जरूरत नहीं है।

Step 1: सामग्री जुटाएं

  • छिछली ट्रे (2-3 इंच गहरी)।
  • मिट्टी या कोकोपीट (Coco-peat)। कोकोपीट सबसे अच्छा है क्योंकि यह हल्का होता है और पानी सोखता है।
  • अच्छी क्वालिटी के बीज (बिना ट्रीटमेंट वाले)।

Step 2: बुवाई (Sowing)

ट्रे में 1-2 इंच कोकोपीट भरें। बीजों को घना करके छिड़कें (स्प्रिंकल करें)। ऊपर से कोकोपीट की एक पतली परत डालें और स्प्रे बोतल से पानी दें।

Step 3: अंकुरण (Germination)

ट्रे को 2-3 दिन के लिए अंधेरे में रखें या किसी अखबार से ढक दें। इससे बीज जल्दी अंकुरित होते हैं। नमी बनाए रखने के लिए रोज सुबह-शाम स्प्रे करें।

Step 4: प्रकाश (Light)

जैसे ही नन्हे पौधे (Sprouts) निकल आएं, ट्रे को रोशनी में रखें। सीधी धूप की जरूरत नहीं है, खिड़की की रोशनी या LED लाइट भी काफी है।

4. कटाई और पैकिंग (Harvesting)

जब पौधों में 2 पत्तियां आ जाएं और ऊंचाई 2-3 इंच हो जाए, तब वे कटाई के लिए तैयार हैं।
तरीका: कैंची से मिट्टी के ठीक ऊपर से काट लें। जड़ों को नहीं खाना है।
पैकिंग: ताजे माइक्रोग्रीन्स को प्लास्टिक के डिब्बों (Punnet Box) में पैक करें। फ्रिज में ये 7-10 दिन तक ताजे रहते हैं।

5. लागत और मुनाफे का गणित (Cost & Profit)

एक 10x20 इंच की ट्रे का हिसाब:

एक ट्रे का अर्थशास्त्र:
  • बीज और कोकोपीट लागत: ₹30 - ₹40
  • उत्पादन: 200 - 300 ग्राम
  • बिक्री मूल्य: ₹100 - ₹150 (प्रति ट्रे)
  • शुद्ध मुनाफा: ₹70 - ₹100 प्रति ट्रे।
  • अगर आप रोज 10 ट्रे बेचते हैं, तो महीने की कमाई ₹25,000 - ₹30,000 आराम से हो सकती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

माइक्रोग्रीन की खेती (Microgreen Farming) शहरी खेती का भविष्य है। इसमें न तो बड़े खेत की जरूरत है और न ही ट्रैक्टर की। बस थोड़ी सी जगह और रचनात्मकता से आप इसे एक सफल बिजनेस बना सकते हैं। इसे आप 'सब्स्क्रिप्शन मॉडल' (Subscription Model) पर भी बेच सकते हैं।

खेती की ऐसी ही नई तकनीकों को वीडियो के माध्यम से देखने के लिए हमारे YouTube चैनल को अभी सब्सक्राइब करें।

📺 YouTube पर वीडियो देखें (Click Here)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ - Microgreen Farming)

Q1. माइक्रोग्रीन्स को कहाँ बेचें?

उत्तर: आप इसे लोकल रेस्टोरेंट, कैफे, सुपरमार्केट, या सोशल मीडिया (Instagram/Facebook) के जरिए सीधे ग्राहकों को बेच सकते हैं।

Q2. क्या कोकोपीट को दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं?

उत्तर: हाँ, लेकिन उसे पहले धूप में सुखाकर स्टरलाइज (कीटाणु रहित) करना होगा ताकि फंगस न लगे।

Q3. क्या इसे बिना मिट्टी के उगा सकते हैं?

उत्तर: बिल्कुल! माइक्रोग्रीन्स को 'हाइड्रोपोनिक्स' (Hydroponics) विधि से सिर्फ पानी और टिश्यू पेपर पर भी उगाया जा सकता है।

Q4. इसमें कौन सी खाद डालनी चाहिए?

उत्तर: माइक्रोग्रीन्स बीज में मौजूद ऊर्जा से ही बढ़ते हैं, इसलिए उन्हें किसी भी बाहरी खाद या उर्वरक की जरूरत नहीं होती। सिर्फ साफ पानी काफी है।

Post a Comment

1 Comments