चेरी की खेती कैसे करें: पॉलीहाउस या नियंत्रित वातावरण में चेरी उगाकर लाखों की कमाई
चेरी (Cherry) एक प्रीमियम फल है जिसकी मांग भारत और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से बढ़ रही है। इसका रंग, स्वाद और पोषण मूल्य इसे बाजार में महंगा और लोकप्रिय बनाते हैं। आमतौर पर चेरी की खेती ठंडे पहाड़ी क्षेत्रों जैसे जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में की जाती है।
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Cherry Farming |
लेकिन आज आधुनिक खेती तकनीकों की मदद से चेरी की खेती को नियंत्रित वातावरण (Controlled Environment Farming), पॉलीहाउस और पॉलीटनेल में भी उगाने के प्रयोग किए जा रहे हैं। इससे किसान उन क्षेत्रों में भी चेरी उगा सकते हैं जहां प्राकृतिक रूप से ठंडा मौसम उपलब्ध नहीं होता।
चेरी फल का परिचय
चेरी एक पत्थरदार फल (Stone Fruit) है जो Rosaceae परिवार से संबंधित है। यह फल मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है।
- स्वीट चेरी (Sweet Cherry)
- सॉर चेरी (Sour Cherry)
भारत में मुख्य रूप से स्वीट चेरी की खेती की जाती है क्योंकि इसकी बाजार में ज्यादा मांग होती है।
चेरी में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं जैसे:
- विटामिन C
- विटामिन A
- एंटीऑक्सीडेंट
- पोटैशियम
- फाइबर
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चेरी की खेती से लाखों की कमाई |
चेरी की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु
चेरी की खेती के लिए ठंडा मौसम आवश्यक होता है। इसे सर्दियों में पर्याप्त ठंड यानी चिलिंग आवर की जरूरत होती है।
- आदर्श तापमान: 15°C से 25°C
- सर्दियों में 7°C से कम तापमान बेहतर
- चिलिंग आवर: 800 से 1200 घंटे
क्या चेरी की खेती पॉलीहाउस में हो सकती है?
सामान्य पॉलीहाउस में चेरी उगाना थोड़ा कठिन होता है क्योंकि चेरी को ठंडे मौसम की जरूरत होती है। लेकिन कुछ आधुनिक तकनीकों से इसे संभव बनाया जा सकता है।
1 लो चिलिंग वैरायटी
कुछ किस्में ऐसी हैं जिन्हें कम ठंड की जरूरत होती है जैसे:
- Minnie Royal
- Royal Lee
- Lapins
- Stella
2 नेट हाउस और पॉलीटनेल
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पैदावार के लिए सही किस्म का चयन बहुत जरूरी है। |
3 कंट्रोल्ड एनवायरमेंट फार्मिंग
- तापमान नियंत्रण
- आर्टिफिशियल चिलिंग
- माइक्रो क्लाइमेट कंट्रोल
चेरी की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी
चेरी की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है।
- दोमट मिट्टी
- बलुई दोमट मिट्टी
- मिट्टी का pH: 6 से 7.5
- पानी का ठहराव नहीं होना चाहिए चेरी के पौधों के लिए बहुत नुकसानदायक होता है।
चेरी की उन्नत किस्में
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चेरी की उन्नत किस्में का चयन। |
भारत में लोकप्रिय किस्में
- बिंग (Bing) यह सबसे लोकप्रिय किस्म है।
- स्टेला (Stella) स्वयं परागण वाली किस्म।
- लैंबर्ट (Lambert) अच्छी पैदावार देती है।
- ब्लैक हार्ट (Black Heart) फल बड़े और स्वादिष्ट होते हैं।
पौधे लगाने का सही समय
चेरी के पौधे लगाने का सबसे अच्छा समय दिसंबर से फरवरी माना जाता है।
खेत की तैयारी
चेरी का बाग लगाने से पहले खेत की गहरी जुताई करें और खरपतवार हटा दें।
गड्ढे का आकार:
- 1 मीटर × 1 मीटर × 1 मीटर
गड्ढे में डालें:
- 20–25 किलो गोबर खाद
- नीम खली
- फास्फोरस
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एक एकड़ में लगभग 150–200 पौधे लगाए जा सकते हैं। |
पौधों की दूरी
- पौधे से पौधे: 5–6 मीटर
- कतार से कतार: 6 मीटर
एक एकड़ में लगभग 150–200 पौधे लगाए जा सकते हैं।
सिंचाई प्रबंधन
गर्मियों में 7–10 दिन के अंतर से सिंचाई करें।
ड्रिप सिंचाई प्रणाली चेरी के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है क्योंकि इससे पानी की बचत होती है और पौधों को बराबर पानी मिलता है।
खाद और उर्वरक प्रबंधन
- 20–25 किलो गोबर खाद प्रति पौधा
- 200 ग्राम नाइट्रोजन
- 150 ग्राम फास्फोरस
- 200 ग्राम पोटाश
पौधों की छंटाई
छंटाई सर्दियों में करनी चाहिए। इससे पौधे का आकार सही रहता है और फल उत्पादन बढ़ता है।
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जल निकासी वाली मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है |
चेरी के प्रमुख रोग और कीट
चेरी की खेती में कुछ प्रमुख कीट और रोग देखे जाते हैं जैसे:
- चेरी फल मक्खी यह फल को खराब कर देती है। नियंत्रण फेरोमोन ट्रैप का उपयोग करें।
- पाउडरी मिल्ड्यू यह एक फफूंदी रोग है। सल्फर आधारित फफूंदनाशक का छिड़काव करें।
इनसे बचाव के लिए समय पर जैविक या रासायनिक नियंत्रण अपनाना चाहिए।
फसल कब तैयार होती है
चेरी का पौधा लगभग 3 से 4 साल में फल देना शुरू करता है।
फसल का समय: मई से जून फल पकने पर लाल रंग के हो जाते हैं।
चेरी की खेती से उत्पादन
एक पेड़ से लगभग 15–30 किलो फल प्राप्त हो सकते हैं।
एक एकड़ से लगभग 4 से 6 टन उत्पादन मिल सकता है।
चेरी की खेती से कमाई
बाजार में चेरी की कीमत लगभग 200 से 600 रुपये प्रति किलो तक होती है।
इस हिसाब से एक एकड़ से 10 से 20 लाख रुपये तक की कमाई संभव है।
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चेरी की तैयार फसल |
चेरी की खेती के फायदे
चेरी की खेती के कई फायदे हैं।
- बाजार में उच्च कीमत
- निर्यात की संभावना
- कम उत्पादन में अधिक लाभ
- प्रीमियम फल फसल
चेरी के स्वास्थ्य लाभ
- दिल के लिए फायदेमंद
- सूजन कम करता है
- नींद में सुधार करता है
- त्वचा के लिए अच्छा
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निष्कर्ष
चेरी की खेती किसानों के लिए एक लाभदायक बागवानी विकल्प बन सकती है। सही किस्म, उचित देखभाल और आधुनिक तकनीक अपनाकर किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. चेरी का पौधा कितने साल में फल देता है?
चेरी का पौधा सामान्यतः 3 से 4 साल में फल देना शुरू कर देता है। सही देखभाल और अनुकूल जलवायु होने पर उत्पादन बेहतर मिलता है।
2. क्या भारत में चेरी की खेती की जा सकती है?
भारत में चेरी की खेती मुख्य रूप से जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे ठंडे क्षेत्रों में की जाती है।
3. चेरी की खेती के लिए कौन सी मिट्टी सबसे अच्छी होती है?
चेरी की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है और मिट्टी का pH 6 से 7.5 होना चाहिए।
4. क्या चेरी की खेती पॉलीहाउस में की जा सकती है?
कुछ लो चिलिंग किस्मों के साथ नियंत्रित वातावरण, पॉलीहाउस या पॉलीटनेल में चेरी की खेती प्रयोग के तौर पर की जा सकती है।
5. चेरी की खेती से एक एकड़ में कितनी कमाई हो सकती है?
चेरी की खेती से एक एकड़ में लगभग 4 से 6 टन उत्पादन मिल सकता है और बाजार कीमत के अनुसार 10 से 20 लाख रुपये तक कमाई संभव है।







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