सारांश: धान भारत की प्रमुख खाद्यान्न फसल है। सही समय पर रोपाई, संतुलित खाद और रोग नियंत्रण से आप अपनी उपज को कई गुना बढ़ा सकते हैं।
🚜 खेत की तैयारी (Field Preparation)
गर्मी में समय मिलने पर खेत की एक बार गहरी जुताई जरूर करें।
- खाद: 20 से 25 गाड़ी गोबर की खाद या कम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर डालें।
- हरी खाद: अगर सन (Sunn hemp) की हरी खाद लगाई है, तो रोपाई से 15 दिन पहले उसे खेत में जोतकर (6 इंच गहरा) सड़ने के लिए छोड़ दें।
- मचाई (Puddling): रोपाई से पहले खेत में पानी भरकर अच्छी तरह मचाई करें और पाटा चलाएं।
- उर्वरक: आखिरी जुताई के समय PSB कल्चर (500 ग्राम) को 100 किलो गोबर की खाद में मिलाकर छिड़कें। साथ ही नाइट्रोजन की आधी मात्रा और पोटाश-स्फुर की पूरी मात्रा मिट्टी में मिला दें।
🌱 धान की रोपाई (Transplanting)
ध्यान देने योग्य बातें:
- पौध की उम्र: पौध 25-30 दिन पुरानी होनी चाहिए और उसमें 5-6 पत्तियां होनी चाहिए। ज्यादा पुरानी पौध लगाने से कल्ले (Tillers) कम फूटते हैं।
- सावधानी: पौध उखाड़ने से 1 दिन पहले नर्सरी में पानी चला दें ताकि जड़ें न टूटें।
💧 सिंचाई प्रबंधन (Water Management)
धान को सबसे ज्यादा पानी की जरूरत होती है, खासकर इन अवस्थाओं पर:
- रोपाई के एक हफ्ते बाद (कल्ले बनते समय)
- बालियाँ निकलते समय
- फूल और दाना बनते समय
प्रो टिप: खेत में हमेशा पानी भरा रहना जरूरी नहीं है। बीच में एक बार पानी निकाल दें और 2 दिन बाद 5-7 सेंटीमीटर पानी फिर भरें। इससे जड़ों को हवा मिलती है।
⚠️ प्रमुख रोग और उनका इलाज (Diseases & Treatment)
1. झुलसा/ब्लास्ट रोग (Blast)
पत्तियों पर आँख के आकार के धब्बे बन जाते हैं और बालियाँ टूटकर गिर सकती हैं।
- रोकथाम: 'नाटीवो' (Nativo) 4 ग्राम प्रति लीटर या 'ट्राईसाइकोलाजोल' 6 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर छिड़कें।
2. खैरा रोग (Khaira Disease)
यह जिंक (Zinc) की कमी से होता है। पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और कत्थई धब्बे दिखने लगते हैं।
- रोकथाम: बुवाई के समय 25 किलो जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर डालें। खड़ी फसल में रोग दिखने पर 5 किलो जिंक सल्फेट + 2.5 किलो चूना पानी में घोलकर छिड़कें।
3. भूरा धब्बा रोग (Brown Spot)
पत्तियों पर तिल के आकार के भूरे धब्बे बन जाते हैं।
- रोकथाम: 'मैन्कोजेब' 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
4. जीवाणु जनित झुलसा (Bacterial Leaf Blight)
पत्तियों के किनारे सूखने लगते हैं।
- रोकथाम: खेत से पानी निकाल दें। स्ट्रेप्टोसाइक्लिन और कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का घोल बनाकर छिड़कें। नाइट्रोजन (यूरिया) का प्रयोग कम कर दें।
🌾 कटाई और मड़ाई (Harvesting)
बालियाँ निकलने के लगभग 1 महीने बाद फसल पक जाती है।
- सही समय: जब 80% बालियाँ सुनहरी हो जाएं और दानों में नमी 20% रह जाए, तब कटाई करें।
- भंडारण: दानों को अच्छी तरह सुखाकर (12% नमी तक) ही स्टोर करें।
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