ईरानी अकरकरा की खेती: 6 महीने में ₹6 लाख तक की कमाई
परिचय (Introduction)
अकरकरा की खेती मुख्य रूप से औषधीय पौधे के रूप में की जाती है। इसके पौधे की जड़ों का इस्तेमाल आयुर्वेदिक दवाइयों को बनाने में किया जाता है। आयुर्वेद में अकरकरा का प्रयोग लगभग 500 वर्षों से किया जा रहा है। मूल रूप से यह अरब का निवासी है, इसलिए इसे 'मोरक्को अकरकरा' भी कहते हैं।
वैज्ञानिक नाम: Anacyclus pyrethrum (ऐनासाइक्लस पाइरेथम)
कुल (Family): Asteraceae (ऐस्टरेसी)
• संस्कृत: आकारकरभ, आकल्ल
• हिंदी: अकरकरा
• गुजराती: अकोरकरो
• अंग्रेजी: Pellitory Root (पेल्लीटोरी रूट)
अकरकरा के औषधीय गुण और फायदे
अकरकरा का उपयोग कई गंभीर बिमारियों में रामबाण इलाज है:
- दांत और मसूड़े: इसके फूल चबाने से दांत दर्द और मसूढ़ों की सूजन कम होती है। जड़ और कपूर का मंजन दांतों के कीड़े खत्म करता है।
- गला और मुंह: मुंह की दुर्गंध दूर करता है और हकलाने की समस्या में लाभ देता है।
- अन्य फायदे: यह सिरदर्द, हिचकी, लकवा, मिर्गी, गठिया (आमवात) और मर्दाना कमजोरी (स्पर्म काउंट) जैसी समस्याओं में अत्यंत लाभकारी है।
खेती के लिए जलवायु और मिट्टी
जलवायु: अकरकरा को समशीतोष्ण जलवायु की ज़रूरत होती है। इसे रबी की फसल (सर्दी) के साथ उगाया जाता है। यह पाले को सहन कर लेता है लेकिन जलभराव बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करता।
- अंकुरण तापमान: 20°C से 25°C
- विकास तापमान: 15°C से 30°C
- मिट्टी: उचित जल निकासी वाली काली, लाल या दोमट मिट्टी सबसे अच्छी है। मिट्टी का pH मान 6 से 8 के बीच होना चाहिए।
खेत की तैयारी और खाद प्रबंधन
चूंकि यह एक कंदवर्गीय (जड़ वाली) फसल है, इसलिए मिट्टी भुरभुरी होनी चाहिए।
- सबसे पहले मिट्टी पलटने वाले हल से गहरी जुताई करें।
- खेत में गोबर की खाद, केंचुआ खाद, नीम की खली और जिप्सम मिलाएं।
- भूमि जनित रोगों से बचने के लिए ट्राइकोडर्मा (Trichoderma) पाउडर का प्रयोग करें।
- आखिर में पाटा लगाकर खेत को समतल करें और मेड (Bed) बनाएं।
बुवाई का तरीका और समय
समय: नर्सरी के लिए अक्टूबर-नवंबर और खेत में रोपाई के लिए नवंबर-दिसंबर का समय उपयुक्त है।
- बीज दर: 5 किलो बीज प्रति एकड़ (कीमत लगभग ₹4000/किलो)।
- बीज उपचार: बीजों को गोमूत्र और ट्राइकोडर्मा से उपचारित ज़रूर करें।
- रोपाई विधि: मेड (Bed) बनाकर रोपाई करें।
- मेड से मेड की दूरी: 1 फीट
- पौधे से पौधे की दूरी: 15-20 सेमी
- गहराई: 2-3 सेमी (ज्यादा गहरा न बोएं)
सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण
सिंचाई: पहली सिंचाई रोपाई के तुरंत बाद करें। पूरी फसल में कुल 5-6 सिंचाइयों की ज़रूरत होती है (20-25 दिन के अंतराल पर)।
निराई-गुड़ाई: रसायनों का प्रयोग न करें। हाथ से 2-3 बार निराई-गुड़ाई करें। पहली गुड़ाई 20-25 दिन बाद करें। इससे जड़ों को हवा मिलती है और वे मोटी होती हैं।
खुदाई और पैदावार (Harvesting)
फसल 6-8 महीने में (अप्रैल-मई तक) तैयार हो जाती है। जब पौधे सूखने लगें, तब खुदाई करें।
- बीज संग्रह: खुदाई से पहले ऊपर के डंठल तोड़कर बीज अलग कर लें (3-3.5 क्विंटल/एकड़)।
- जड़: खुदाई के बाद जड़ों को धोकर छाया या हल्की धूप में 2-3 दिन सुखाएं। सूखी जड़ों का उत्पादन 9-11 क्विंटल/एकड़ होता है।
💰 लागत और बंपर मुनाफे का गणित (2026 भाव)
वर्तमान समय में अकरकरा की माँग बढ़ने से इसके भाव में भारी उछाल आया है। नीचे दिया गया गणित ₹700/किलो के ताज़ा भाव पर आधारित है।
1. अनुमानित लागत (प्रति एकड़)
| विवरण (Particulars) | खर्च (₹) |
|---|---|
| जमीन तैयारी (जुताई आदि) | 4,000 |
| जैविक खाद | 20,000 |
| बीज (5 किलो @ ₹4000) | 20,000 |
| बुवाई, सिंचाई और मजदूरी | 5,500 |
| कुल लागत (Total Cost) | ₹49,500 |
2. कुल कमाई (Total Income)
| उत्पाद | वजन (लगभग) | भाव (₹/kg) | कुल राशि (₹) |
|---|---|---|---|
| बीज (Seeds) | 3 क्विंटल | 100 | 30,000 |
| सूखी जड़ें (Roots) | 8 क्विंटल | 700 | 5,60,000 |
| कुल आय (Total Income) | 5,60,000 | ||
🚀 शुद्ध मुनाफा (Net Profit)
₹5,60,000 (आय) - ₹50,000 (खर्च)
= ₹5,10,500
(मात्र 6 महीने में, एक एकड़ से)
निष्कर्ष (Conclusion)
किसान भाइयों, आज के समय में अकरकरा की खेती 'सोने की खान' बन चुकी है। जहाँ साधारण फसलों से 40-50 हज़ार बचते हैं, वहीं अकरकरा आपको 6 लाख तक का मुनाफा दे सकता है। बस ध्यान रखें कि जल निकासी अच्छी हो और बीज उपचारित हो।
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